धूप-छांव

 धूप-छांव  

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"रोहन देखो, मौलिक स्कूल भी जाने लगा और तुम अभी तक तैयार भी नहीं हुए।"


"अरे मम्मा ! मौलिक साइकिल से जाता है , उसे पन्द्रह मिनट लगेंगे स्कूल पहुँचने में और मैं अपनी गाड़ी से पांच मिनट मे पहुँच जाऊँगा।" शेखी बघारते हुए


 "रोहन की बात सुन मौलिक ने जोर से पैडल पर पैर मारा, पापा की तो हैसियत ही नहीं है गाड़ी खरीदने की और अगर खरीद भी ली तो पेट्रोल का खर्च....?"मन उदास हो गया।

कभी कभी रोहन और उसके साथी उसे बैलगाड़ी वाला कहकर चिढ़ाया करते थे। याद आते ही आँखें भर आईं


मेन रोड पर किसी नेता की रैली निकलने के कारण रोड बंद थी। वह साइकिल पर होने के कारण आसानी से निकल गया। किन्तु रोहन जाम में फंसने के कारण स्कूल देर से पहुँचा।

मौलिक को देखते ही रोहन ने सिर झुका लिया क्योंकि उसे स्कूल देर से पहुँचने के कारण सजा जो मिली थी। 


स्कूल से लौटते समय मौलिक ने अपनी साइकिल को प्यार से सहलाया फिर धीरे-धीरे पैडल मारते हुए साइकिल की सवारी का आनंद लेने लगा।


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