क्या भारत में क्रिप्टो करेंसी पर लग सकती है रोक ?

 क्या भारत में क्रिप्टो करेंसी पर लग सकती है रोक ?


जी हाँ , सम्भव है . परन्तु ऐसी क्रिप्टो करेंसी जो प्राइवेट होगी .
 भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वर्तमान में दिसंबर में चल रहे संसद सत्र में भारत सरकार द्वारा ऐसी बिल लायी जा सकती है . अभी ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि भारत में प्राइवेट क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट किया जाएगा .

क्या भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर बिल आएगा ?

फिलहाल अभी ऐसी कोई आशा नहीं है कि क्रिप्टोकरेसी पर कोई बिल संसद में पेश किया जायेगा.
भविष्य में आशा है कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए कोई बिल संसद में पेश किया जायेगा .

क्रिप्टो करेंसी बिल लाने का मुख्य उद्देश्य  क्या है ?

क्रिप्टो करेंसी बिल को लाने का मुख्य उद्देश्य भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के निर्माण के लिए एक सुविधाजनक व्यवस्था तैयार करना और देश में सभी डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबन्ध लगाना है. हालांकि इस बिल में यह भी दर्शाया गया है कि यह बिल कुछ मामलों में राहत भी देता है जिसके तहत क्रिप्टोकरेंसी के तकनीक व् उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है .

भारतीय रिजर्व बैंक काफी समय से अपनी डिजिटल करेंसी जारी करने के विषय में विचार कर रहा है परन्तु यह अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है कि इसका पायलट प्रोजेक्ट कब तक प्रारम्भ होगा . अभी तक इस बिल की सटीक रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की गयी है और न ही इस विषय पर सार्वजनिक तौर पर विचार-विमर्श हुआ है.   
वित्त मंत्रालय काफी समय से इस विषय पर कुछ नहीं बोल रहा है और ऐसा माना जा रहा है कि ये बिल अगस्त से ही मंत्रिमंडल की अनुमति के लिए तैयार है . 

इस बिल को लेकर बहुत सारे प्रश्न जुड़े हुए हैं क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी में काफी लोगों का निवेश है . 

अगर सरकार सभी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित कर देती है तो उन लोगों का क्या होगा जिन्होंने क्रिप्टो में निवेश किया हुआ है ?
हालांकि सरकार का उद्देश्य इन डिजिटल करेंसी को लेकर कुछ और भी है .'द हिन्दू' के रिपोर्ट के अनुसार बीते तेरह नवम्बर २०२१ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्रिप्टोकरेंसी  पर नियम बनाने को लेकर एक बैठक की थी , जिसमे केन्द्रीय बैंक , गृह और वित्त मंत्रालय के सभी अधिकारी शामिल हुए थे . इस बैठक के दौरान यह सहमति बनी है कि बड़े - बड़े वादों और गैर पारदर्शी विज्ञापनों से युवाओं को गुमराह करने की कोशिशों को रोका जायेगा . इसी दौरान यह भी पाया गया कि अनियंत्रित क्रिप्टो बाज़ार मनी लोंड्रिंग और आतंकी फंडिंग के लिए प्रयोग की जा सकती है इसी कारण सरकार इस क्षेत्र के लिए तेजी से कदम उठाने को दृढ संकल्प है . 

आखिर क्या है क्रिप्टोकरेंसी ?

क्रिप्टोकरेंसी किसी मुद्रा का एक डिजिटल रूप है . यह किसी सिक्के या नोट की तरह आपकी जेब नहीं होता है .
ये पूरी तरह से ऑनलाइन होती है और व्यापार के रूप में बिना किसी नियमों तहत इसके जरिये व्यापार होता है .
इसको कोई सरकारी या विनियामक अथोरिटी जरी नहीं करती है .

केंद्रीय रिजर्व बैंक ने इस साल फिर से डिजिटल करेंसी के कारण साइबर धोखाधड़ी के मुद्दे को उठाया है . 2018  में भारतीय रिजर्व बैंक ने क्रिप्टो करेंसी के लेन-देन को लेकर बैंकों और वित्तीय संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया था लेकिन मार्च  2020  में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा था कि सरकार को कोई निर्णय लेते हुए इस मामले पर एक सटीक क़ानून बनाना चाहिए . इस साल मार्च में एक बार आर बी आई  ने कहा था कि वे भारत की खुद की क्रिप्टोकरेंसी को लाने और उसके चलन को लेकर विकल्प तलाश  रही है .सरकार को इस करेंसी के भविष्य को लेकर एक नजरिया यह भी निर्णायक होगा कि भारत में इस मुद्रा का कैसे इस्तेमाल होगा . इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि कितने भारतीयों के पास क्रिप्टो करेंसी है और कितने लोग इस मुद्रा के माध्यम से व्यापार करते हैं .लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस करेंसी में करोड़ों लोग व्यापार कर रहे हैं और बहुत से लोग इस करेंसी में अपना पैसा लगाने की सोच रहे हैं .


यह लेख विभिन्न सूचनाओं के आधार पर संकलित की गयी .






एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ