हिंदी वर्णमाला पर एक विशेष; बाल-गीत

हिंदी वर्णमाला पर एक विशेष
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बाल-गीत
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क ख ग घ पढ़ते पढ़ते ए बी सी तक आये,
किन्तु कभी अंग्रेजी में कुछ बोल न मीठे पाए।
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अ' से 'अनार', 'आम' है 'आ' से ,'इ' से 'इमली' खट्टी,
'ई' से 'ईख' बोलिए मीठा कभी न होगी कुट्टी।
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'उ' से 'उल्लू' बड़ा सयाना,'ऊ' से 'ऊन' के गोले,
'ए' से 'एड़ी', ' ऐ ' से 'ऐनक' पकड़ कान को जो ले।
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'ओ' से 'ओखल' धान कूटती जिसमें मौसी,चाची,
ममता की मूरत लगती है 'औ' से 'औरत' साँची।
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'अं ' से मीठे सबको भाते हैं 'अंगूर' रसीले।
'अ:'  से आहा क्या कहना है भाई सुख से जी ले।
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'क' से कहो 'कबूतर' छत पर गुटुर गुटुर जो बोले,
'ख' से है 'खरगोश' सलोने,लगते सुंदर भोले।
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'ग' से 'गमला' खिल जाता है सुंदर फूलों वाला,
'घ' से 'घड़ी' जगाती सबको ,कहती हुआ  उजाला।
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'च' से 'चश्मा', 'छ' से 'छतरी' दोनों खूब सुहाते ,
'ज' से हुआ 'जहाज' कि 'झ' से 'झरना'  जहाँ नहाते।
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'ट' से 'टमटम' और 'टमाटर' ,'ठ' से हुआ 'ठठेरा',
'ड' से 'डलिया', 'ढ' से 'ढक्कन' क्या तेरा , क्या मेरा।
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'त' से 'तकली','थ' से 'थन' हैं दूध भरे गैया के,
'द' से 'दर्जी' जो सिल देता है कपड़े भैया के।
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'ध' से 'धनुष' हुआ करता है जिसे राम जी धारे,
'न' से 'नल' है जिसके जल के रहते लोग सहारे।
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'प' से उड़ी 'पतंग' लूट कर ले जाये ना  दूजा,
'फ' से 'फरसा' ,'ब' से 'बगुला' ,'भ' से है 'भड़भूजा'।
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'म' से 'मछली' रंगबिरंगी पानी में इठलाये,
'य' से 'यज्ञ' किया देवों ने तब रिपु से लड़ पाए।
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'र' से 'रथ' है जिस पर चढ़कर वीर युद्ध को जाते,
'ल' से 'लट्टू' बच्चे छोटे हँसकर जिसे नचाते।
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'व' से 'वर' की बात करें जो ब्याह दुल्हनियाँ लाये,
'श' से 'शलजम' जिसे शौक से सारी दुनिया खाये।
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'ष' से है 'षटकोण' और है 'स' से तेज सरौता,
'ह' से 'हल' जो अन्न उगाकर दे गरीब को न्योता।
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''क्ष से 'क्षत्रिय' ,'त्र" से 'तृण" है, 'ज्ञ' से होता ज्ञानी,
पूरी हुई वर्णमाला तो पूरी हुई कहानी।
--------  प्रो.विश्वम्भर शुक्ल

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