भारत में गूगल -पे बिना मंजूरी के कैसे चल रहा है इसका जवाब हाईकोर्ट ने मांगा है।
मंजूरी के बगैर गूगल- पे के जरिए हो रहे लेनदेन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक से जवाब मांगा है ।हाईकोर्ट ने इस मामले में गूगल इंडिया को भी नोटिस जारी कर 29 अप्रैल 2019 तक पक्ष रखने को कहा है । चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस अनूप जे०भंभानी की पीठ ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में गूगल पर अवैध तरीके से अपने जी - पे के जरिए वित्तीय लेनदेन करने का आरोप लगाया गया है।
अभिजीत मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में आरबीआई को जी-पे के जरिए हो रहे भुगतान और लेन-देन पर रोक लगाने का आदेश देने की मांग की गई है । याचिका में कहा गया है कि गूगल-पे भुगतान एवं निपटान कानून का उल्लंघन कर भुगतान प्रणाली सेवा प्रदाता के रूप में काम कर रहा है ।याचिका में कहा गया कि गूगल को भुगतान सेवा प्रदाता के रूप में काम करने को लेकर आरबीआई से वैध मंजूरी नहीं मिली है, साथ ही यह भी कहा गया कि रिजर्व बैंक की ओर से 20 मार्च 2019 को जारी अधिकृत भुगतान प्रणाली परिचालकों की सूची में गूगल-पे का नाम नहीं है।

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