सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
घरे घरे घूम घूम लइका खोजाला।
लइका के माई के कुछु ना बुझाला।
माई जे बूझे त बाप नाहीं बूझे।
बाप जदि बूझे त लइका न सूझे।
लइका बोलवले में मास्टर परिसान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
पढ़ाई जरूरी कहि नमवा लिखाई।
लेकिन स्कूलिया में लइका न आई।
लइका जे आई त कॉपी न लाई।
कॉपी जे लाई त रोज नाही आई।
पढ़ला के सुख से ऊ बनत अनजान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
नेवता हकारी में लइका ही जाई।
लईकी अगोरी घर नाते घूमी माई।
घूमी जे माई त बाप चिल लहियें।
खेतिया करावे बदे स्कूलिया छोड़ वहियें।
लइकन के माथे सब कमवा धरान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
गऊंवा बारात आईल लईका हेरईलें।
कटनी से रोपिया ले लइका नथईलें।
लइका नथईलें त स्कूलिया न आवें।
मास्टर फिर घूम घूम लईका बोलावें।
बोलवला पे अइला के तनिको न ध्यान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
केतनो बोलावा माई बाप नाहीं आवे।
लइका के कागज भी मास्टर बनवावे।
मास्टर बनवावे त फारम भराई।
नाव गांव खाता सब ठीक से लिखाई।
DBT करावे बदे जियरा किचवान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
कवनो परीक्षा हो ड्यूटी करी मास्टर।
कवनो हो सर्वे रेकार्ड धरी मास्टर।
ऑन लाइन चक्की में मास्टर पेरई हियें।
रोज रोज जांची में मास्टर धरई हियें।
तब्बो न एनकर कतहीं ठेकान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
एगो बात कहत बानी सुनी सब ध्यान से।
स्कूलवा के जोड़ी सब अपने पहिचान से।
लइकन के भेजी पढ़े भूली रिश्तेदारी।
पढला से भागी समाज के बीमारी।
शिक्षा से गांव देश बनल महान बा।
सरकारी स्कूलवा के मास्टर हलकान बा।
श्वेता राय

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