आखिर क्या है भाषा टी ई टी प्रकरण ? आइए जानते हैं । क्यों खारिज हुआ अभ्यर्थन ?

 आखिर क्या है भाषा टी ई टी प्रकरण ? आइए जानते हैं । 

अभी हाल ही मे आए हाईकोर्ट के डबल बेंच  के फैसले ने टेट उपाधि धारकों के मन मे एक शंका उत्पन्न कर दिया है । 

वर्ष 2011 से 2013 तक यूपीटीईटी LEVEL 1 और LEVEL 2 के साथ - साथ केवल भाषा TET  ; हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की एक विशेष टीईटी परीक्षा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराई गयी थी। उसी सम्बंध मे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि संस्कृत भाषा मे टीईटी प्रमाणपत्र धारक प्राथमिक शिक्षक चयन के लिए पात्र नहीं होंगे। 

न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति डी . रमेश की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया।

एकल पीठ के फैसले के विरुद्ध जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुरादाबाद की ओर से यह याचिका दाखिल की गयी थी । उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित प्राथमिक विद्यालयों मे सहायक अध्यापक पद के लिए न्यूनतम योग्यता मे केवल संस्कृत विषय से टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को योग्य नहीं माना गया है । क्योंकि प्राथमिक स्तर मे पढ़ाने के लिए अभ्यर्थियों को हिन्दी , संस्कृत/उर्दू/इंग्लिश( तीनों मे से किसी एक ) , गणित, पर्यावरण एवं बाल मनोविज्ञान मे टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक है ।  इसके बावजूद भी कई अभ्यर्थियों ने शिक्षक पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की। जिसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुरादाबाद ने खारिज कर दिया था । 


           जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के इस आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट पहुंचे महेंद्र व अन्य को एकल पीठ ने 14 मार्च 2023 को बड़ी राहत देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के फैसले को खारिज कर दिया । 

इसके विरुद्ध बीएसए की ओर से दाखिल विशेष अपील पर दो जजों की खंडपीठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति डी . रमेश की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया।
 

पीठ ने अपने निर्णायक आदेश मे स्पष्ट किया कि बीएसए के निर्णय मे कुछ भी गलत नहीं है। याचीगण के पास संस्कृत भाषा मे तो टीईटी पास होने का प्रमाणपत्र है , किन्तु कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के लिए जरूरी ( हिन्दी , गणित , पर्यावरण , बाल मनोविज्ञान एवं संस्कृत /उर्दू /अंग्रेजी ) मे टीईटी पास होने का प्रमाणपत्र नहीं है । 

लिहाजा , विज्ञापित शर्तों के अनुसार प्राथमिक शिक्षक पद के लिए वे योग्य नहीं हैं। 

देखिये अब क्या होता है ? क्या महेंद्र आदि सुप्रीम कोर्ट जाते हैं या नहीं ?




 

  

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