क्या अब बी एड अभ्यर्थी 69000 शिक्षक भर्ती से बाहर कर दिए जाएंगे ?

 

क्या अब बी एड अभ्यर्थी 690000 शिक्षक भर्ती से बाहर कर दिए जायेंगे ?

उत्तर प्रदेश की सरकार वर्तमान समय में बहुत ही ऊहापोह की स्थिति से गुजर रही है। क्योंकि 2017 में शिक्षामित्रों के समायोजन निरस्त होने के बाद 69000 शिक्षक भर्ती में बैकडोर से बी एड वालों को प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक के पद पर बिना ब्रिजकोर्स कराए ही नियुक्त कर दिया था। NCTE के गाइड लाइन के अनुसार यदि उस प्रदेश में पर्याप्त संख्या में बी टी सी अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हैं तभी बी एड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों की नियुक्ति टीईटी पास होने के बाद 6 माह का ब्रिज कोर्स कराकर प्राइमरी में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए की जा सकती है। 

NCTE ने राज्यों से यह नहीं पूछा कि, आपके यहां पर्याप्त संख्या में BTC अभ्यर्थी उपलब्ध हैं या नहीं , प्राइमरी में बीएड
डिग्री धारी अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक भर्ती में शामिल करने की अनुमति प्रदान कर दी।

मामला तब अटक गया जब राजस्थान के बीटीसी अभ्यर्थी कोर्ट चले गए और वहां से बीएड अभ्यर्थियों को कोर्ट ने प्राइमरी लेवल से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

बीएड अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वहां से भी कोई राहत न देते हुए NCTE द्वारा जारी 28.06.2018 के विज्ञप्ति को ही खारिज करते हुए बीएड डिग्री धारकों को प्राइमरी लेवल के बच्चों को पढ़ाने के लिए अयोग्य करार दिया।

इसी नोटिफिकेशन के आधार पर ही उत्तरप्रदेश सरकार ने भी बीएड डिग्री धारक अभ्यर्थियों को 69000 शिक्षक भर्ती में प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक के पदों पर चयन के लिए टीईटी में योग्य माना था।
 अब बीटीसी अभ्यर्थी पुनः कोर्ट पहुंच गए हैं और बीएड अभ्यर्थियों को 69000 शिक्षक भर्ती में सहायक अध्यापक के पदों पर कार्यरत अभ्यथियों को बाहर करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

क्योंकि जब NCTE का 28.06.2018 का नोटिफिकेशन ही खारिज हो चुका है तो बीएड अभ्यर्थियों की सीटीईटी व टीईटी की मार्कशीट भी रद्द हो चुकी है। इसलिए अब ये अभ्यर्थी सहायक अध्यापक बनने के योग्य ही नहीं हैं। 

RTE ACT 2009 के अनुसार बिना टीईटी के कोई भी  अभ्यर्थी सहायक अध्यापक नहीं बनाया जा सकता है।
इसलिए हर हाल में सभी राज्यों को अपने यहां 2011 के बाद से बीएड डिग्री धारक अभ्यर्थियों को प्राइमरी में कक्षा 1 से 5
तक की कक्षाओं में बीएड अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।

इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार को भी 69000 शिक्षक भर्ती मे शामिल बीएड अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक के पदों से हटाना पड़ेगा।

देखो भविष्य में क्या होता है। क्योंकि एनसीटीई ने अपना आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पक्ष में जारी करके सभी राज्यों को कोर्ट का आदेश मानने के लिए कह दिया है। 













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