भोजपुरी में 'भी' के प्रयोग - डॉ मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध'आजु काल्हि अइसन देखल जात बा कि लोग भोजपुरी ठेठ रुप में ना लिखि के खड़ी बोली का क्रिया के बदलि देत बाड़न आ बूझे लागत बाड़न कि ई हे भोजपुरी हवे। हम भोजपुरी में अउरी भखन के सब्दन के पचावे का विरोध में नइखी बाकिर इमें भोजपुरियापन आवे के चाहीं । अब एगो छोटहन सब्द बा 'भी' ई खाँटी खड़ी बोली के शब्द हवे । 'ही' का अर्थ में प्रयोग होला । जहाँ अवश्य भा जरुर का अर्थ में जोर देवे के होला ओइजा एकर प्रयोग कइल जाला ।
जइसे - राम भी मेंले में गया था ।
अब आजु काल्हि के भोजपुरी लिखे वाला लोग एके ओही तरे लिखि देत बाड़न जइसे - 'राम भी मेला में गइल रहलन हा ।' होखे के ई चाहीं कि भोजपुरी के आपन संस्कार गायब ना होखे के चाहीं । भोजपुरी खड़ी बोली का बनिस्पत, संस्कृत, प्राकृत आ अपभ्रंश का ढेर निगिचा बा । एसे समयानुसार एकर रुप बदलल करी ।
भोजपुरी में 'भी' का जगहा पर संज्ञा सब्दन का बाद में - 'ओ' लगा दिहला से ओ पर 'भी' नीयर जोर पड़े लागी।
जइसे -'रामो मेला में गइल रहलन हा।' दुधो में पानी मेरावल रहल ह । ' बरिआती का सजावटो में कमी ना रहल ह ।
अगर सर्वनाम सब्दन का बाद 'भी' के प्रयोग करे के बा त ओकरा खातिर उत्तम पुरुष आ मध्यम पुरुष में 'हूँ' आ अन्य पुरुष में 'हो' या 'हौ' लगा देवे के चाहीं । जइसे - हमहूँ अखबार पढत रहलीं हा। तूहूँ खेलत रहला हा । उहो बिना बिना टिकट के रहलन हा। उहौं का बाति मानि लिहली हा । आदि ।
अगर विशेसन शब्दन का बाद 'भी' अइसन जोर देवे के बा त एहूजा संज्ञा नीअर 'ओ' के माला सब्द का आखिर में लगा दिहला से काम चलि जाई ।
जइसे-
विदमानों आदिमी कबो कबो गलती कई देला । दसो आदिमी औ मिलिके ओके ना उठा सकल । सेरो भर अनाज एह साल खेत में ना भइल हा । हिंदी में जहाँ 'भी' विशेष्य क बाद में लगावल जाला, भोजपुरी में विशेषण का तुरते बाद लगा दिहल जाला । क्रिया विशेषण सब्दन में संज्ञा नीअर 'ओ' के मात्रा लगा के 'भी' के बोध कइ दिहल जाला ।
जइसे - घोड़ा सूघर के साथे साथे फरहरो बा । दूध मीठो बा आ सहतो बा ।
भोजपुरी भाषा में एक रुपता ले आवे खातिर अलग-अलग सब्दन का प्रयोग पर चर्चा होखे के चाहीं । हम नइखी कहत कि हम जेवन बात कहत बानी ऊहे सही बा । एह पर पाठक विदवान लोगन का विचार करे के चाहीं, आपसी विचार विमर्श से एक निश्चित मत मालूम होखी आ सभे ओके मानि के चली एसे भोजपुरी में एकरुपता आई आ भाषा ठोस रुप संस्कार होखी ।
एकरा बारे में आपन विचार सम्पादक जी कींहाँ भा हमारा पास सीधे भेजल करीं सभे ।
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