एकता 


किसी जंगल मे एक शेर राहत था ।  जिससे सभी पशु - पक्षी बहुत डरते थे । शेर रोज किसी एक जानवर को मार कर अपना पेट भारत था।  उसी जंगल में खरगोश,कछुआ ,बंदर, और हिरण ये चारों पक्के और सच्चे दोस्त थे।  जो हमेशा हर जावर की मदद करने को तैयार रहते थे । 
       एक दिन एक भेड़िया उस जंगल में पहुंचा रास्ते मे उसे भालू मिला ।  भालू ने उसको जंगल के सारे कायदे कानून बताए की यहाँ का राजा शेर रोज एक जानवर को मारकर खाता है, उससे बच कर रहना चालाक भेड़िये ने सोचा , शेर से मित्रता करके उसका हितैषी बनकर , उसका दिल जीतना चाहिए।  इससे मेरी जान तो बच जाएगी।  
    भेड़िया शेर की गुफा मे गया और सोये हुए शेर के पास बैठ गया।  शेर नींद से जब जग तो भेड़िये को खाने को उद्दत हुआ।  भेड़िये ने कहा महाराज पशुलोक से पशुदेवता ने आपकी सेवा के लिए मुझे भेजा है।  अब आपको मै शिकार लाकर दूंगा शेर भेड़िये की बात मान ली।  
     भेड़िये ने जंगल मे यह ढिढोरा पिटवा दिया की मै पशुलोक से राज्य शेर का सेवक बन कर आया हूँ।  प्रतिदिन जंगल के राजा की भूख मिटाने के लिए एक प्राणी मेरे साथ चलेगा।  जंगल के सभी जानवर डर गए और भेड़िये की बात मानने को तैयार हो गए।  
            शेर के पास जाने के क्रम मे एक दिन खरगोश की बारी आई और भेड़िये उसे ले जाने लगा।  
 तभी वह हिरण,बंदर , और कछुआ भी आ पहुचे और उसके साथ जाने की जिद करने लगे शेर के सामने पहुंचकर चारों ने बारी - बारी अपनी बात शेर से कही सबसे पहले खरगोश बोला, महाराज आज मै आपका भोजन हूँ कछुआ बोला नहीं महाराज आप अकेले खरगोश को नहीं खाईये मुझे भी खाईये तभी बंदर कहता है।  महाराज  मै बड़ा हूँ मुझे अपना भोजन बना लीजिए इतने में हिरण बोल पड़ा महाराज इन तीनों को छोड़ दीजिए  मैं अकेला ही तीनों के बराबर हूँ । आप मुझे अपना शिकार बना लीजिए । 
       भेड़िये ने यह सब सुन रहा था । उसने कहा, महाराज, देर ना करें इन चारों की यतों में ना आए , एक झटके में इनको खत्म करके अपनी भूख मिटाए। तभी शेर ने चारों को अपने पास बुलाया और कहा , मैं तुम्हारी सच्ची एकता , मित्रता और त्याग देख कर बहुत खुश हुआ। यह कह कर शेर ने भेड़िये को अपना शिकार बना दिया । 
     
 शिक्षा :- 
               किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए आपसी एकता होना बहुत जरूरी है । एकता स्नेह और विश्वास । स्नेह के आधार से ही सहयोगी बन पाते है । सहयोगी बनने के लिए अपने को मिटाना होता है । इसलिए आप हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करते रहो । 




                                    सदैव प्रसन्न रहिए - जो प्राप्त है , पर्याप्त है । 
                                    जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है ॥  

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