जीवन की अमूल्य संपदा हैं किताबें , इनका पूरा लाभ उठाइए
1 . क्या आप अपनी मोबाईल की जिंदगी से ऊब चुके हैं ?
तो फिर आ जाइए अपने पुराने दिनों मे और अपनी छूटी हुई किताबों को पुनः सँजोते हुए उनका अध्ययन फिर से प्रारंभ कर दीजिए , क्योंकि इस दुर्लभ जीवन की अमूल्य सम्पदा हैं पुस्तकें ।
2 . किताबों को फिर से क्यों पढ़ना चाहिए आओ इस बिन्दु पर एक बार विचार करते हैं ।
क्योंकि नौकरी मिलते ही पढ़ाई - लिखाई अथवा पुस्तकों से हमारा नाता टूट जाता है । हमें लगता है कि अब जीवन मे किताबों का कोई महत्त्व नहीं रह गया है । लेकिन यह हमारी गलतफहमी है । पुस्तकें हमें केवल रोजगार दिलाने का माध्यम नहीं है , बल्कि वे एक विश्वानीय मित्र , अभिभावक , गुरु व चिकित्सक भी हैं । प्रख्यात विचारक एरिन ला रोजा ने अपनी पुस्तक 12 साइनटिफ़िक वेज : रीडिंग कैन एकचुअली इम्प्रूव योर लाइफ में बताया है कि नियमित अध्ययन आपका जीवन बदल सकता है । जो काम चिकित्सा या दवा नहीं कर सकती, वह किताबें कर सकती हैं ।
3 . प्रोफेसर एनी ई . कनिंगम के अनुसार :
कैलिफॉर्निया विश्वविद्यालय की प्रवक्ता एनी ई कनिंगम ने अपने सोध पत्र व्हाट रीडिंग डज फॉर द माइन्ड में दावा किया है कि रुचि के साथ पढ़ी गई किताबें आप को न सिर्फ तनावों से मुक्ति दिलाती हैं, बल्कि इनको पढ़ने से आप अच्छी मनः स्थिति में आ जाते हैं ।
वर्ष 2009 में हुए एक शोध में दावा किया गया था कि केवल छह मिनट किताब पढ़ने से आप के तनाव के स्तर में 68% तक की कमी आ सकती है ।
4. क्रिस्टेल रसल के अनुसार किताबों के अध्ययन का मानव जीवन पर प्रभाव :
मानव व्यवहार के विख्यात प्रोफेसर क्रिस्टेल रसल का मानना है कि किताब पढ़ने से स्मरण शक्ति वाली मांस पेशियों का खूब व्यायाम होता है, जिससे आप स्वयं को मानसिक और शारीरिक स्तर पर अधिक प्रसन्न और चैतन्यता का अनुभव करते हैं।
पुस्तकें पढ़ते पढ़ते आपके भीतर एक चिंतक , लेखक व दार्शनिक भी पनपता चला जाता है , जो
आपके जीवन की दशा और दिशा निर्धारित करता है ।
सूचना क्रांति के इस युग में ई - पुस्तकों के माध्यम से जीवन में यह क्रांति संभव हो सकती है , इस दुर्लभ जीवन की अमूल्य सम्पदा है , इनका पूरा लाभ उठाइए ।
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आपका : राम नारायण शर्मा
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