प्यारी सी मुस्कान

 प्यारी सी मुस्कान


म्मी जी.....ये आज इतनी सारी गाजरें क्यों मंगवाई है....

अरे बहू.....निशा और नितिन दोनों को ही गाजर का हलवा बहुत पसंद है सर्दियां शुरू होती नहीं की इनकी फरमाइश शुरू हो जाती है।


 गाजर का हलवा.....वो तो मुझे भी बेहद पसंद है ....माधवी ने मन ही मन मे मुस्कुराते हुए सोचा पर वो संकोचवश अपनी सासु मां सुषमा जी से बोल नहीं पाई।

वैसे भी जब घर में हलवा बनेगा तो खाएंगे तो सभी ।

यही सोचकर माधवी ने गाजरों को धो कर किसना शुरू कर दिया। सासू मां ने अपने हाथों से गाजर का हलवा बनाया।

खुशबू इतनी अच्छी आ रही थी कि सब इंतजार कर रहे थे कब हलवा बनकर तैयार हो।


जैसे ही हलवा तैयार हुआ सुधा की सासू मां सुषमा जी ने सबसे पहले भगवान को भोग लगाया....वहीं निशा और नितिन किसी छोटे बच्चे की तरह हलवे पर टूट पड़े। 

तभी अचानक सुषमा जी के फोन की घंटी बजी।


अरे नितिन ! तुम्हारी मनीषा दीदी और जीजू आ रहे हैं।सासु मां ने चहकते हुए बड़ी बेटी के आने का समाचार सुनाया।

चलो अच्छा है, बडे अच्छे मौके पर आ रहे हैं ।

हमारे दामाद जी को भी गाजर का हलवा बहुत पसंद है सुषमा जी ने खुश होते हुए कहा ।


 सभी आ गए और टेबल पर खाना सज गया। माधवी सब को खाना परोस रही थी सब ने जी भरकर खाया और हलवे का डोंगा भी धीरे धीरे खाली होता गया ।

अंत में जब माधवी के खाने की बारी आई तो डोंगे में सिर्फ दो चम्मच हलवा ही बचा था ।

जब माधवी की मां हलवा बनाती थी तब सबसे पहले माधवी ही जी भरकर खाती थी बाद में किसी का नम्बर आता था। ये सोचते - सोचते माधवी का गला भर आया और वो दो चम्मच हलवा भी माधवी के गले से नीचे नहीं उतरा। वो बिना खाए ही डाइनिंग टेबल से उठ गई।


 अगले महीने जब माधवी अपने मायके गई तो मां ने माधवी की भाभी सुधा से कहा , "सुधा बहु आज मोहन से कह देना आते समय बाजार से गाजर ले आए।"

माधवी आई है इसलिए कल उसका मनपसंद गाजर का हलवा बनाऊंगी।


 अगले दिन मां ने बड़े चाव से माधवी के लिए हलवा बनाया। मां ने सबसे पहले कटोरी भरकर माधवी की ओर बढ़ाया तो माधवी बोली , नहीं मां.... पहले हलवा सुधा भाभी को दो।


 मां अवाक सी माधवी का मुंह देखने लगी। लेकिन बेटा तुझे तो बहुत पसंद है ना मेरे हाथों का हलवा ।


  हां मां..... मुझे बहुत पसंद है लेकिन क्या आपने कभी भाभी से पूछा है कि उन्हें क्या पसंद है....


ये क्या बोल रही है तूं बेटा....यदि उसे पसंद होता तो वो बोलती ना ?


 नहीं मां.....आज मैंने खुद बहु बनकर जाना की एक बहु से ना तो उसकी पसंद पूछी जाती है और ना हीं वो अपनी पसंद बता पाती है।आप प्लीज़ पहले हलवा भाभी को हीं दो क्योंकि वो भी शायद मेरी तरह ही अपनी पसंद नापसंद हमें नहीं बता पाती होगी।


 ठीक है बेटा...मैं तुम दोनों को हीं पहले परोस देती हूं कहकर मां ने दो कटोरियां भर दीं और अपनी बहु सुधा को आवाज लगाई , "सुधा बहु....आजा बेटा तेरा हलवा ठंडा हो रहा है

आज दोनो बेटियों को एकसाथ हलवा खाते देखकर जहां सचमुच मां के मन मे सुकून था वहीं दोनो ननद भाभी की भीगी हुई आँखें और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान थी...

दोस्तों....

 पोस्ट की साथर्कता आप अपने घरों में बेटी और बहुओं को समान प्यार और सम्मान दे ....

वहीं हर बेटी और बहु अपनी मां और सासूंमा मे कोई भेदभाव ना कर पूर्णतया आदर और सत्कार करे ।

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