क्या कुछ दिनों बाद हवा भी मार्केट में बिकेगी ?
आपको कौन सी हवा की बोतल चाहिए - ऑस्ट्रेलिया वाली कि नैनीताल वाली ?
दिल्ली की हवा क्या खराब हुई ,शुद्ध हवा बेचने वाले चले आये हैं। जैसे आदमी के दिन खराब हों , तो गंडे -ताबीज बेचनेवाले चले आते हैं ,अर्थव्यवस्था की हवा खराब हो ,तो नई -नई नीतियाँ बेचनेवाले चले आते हैं और सरकार की हवा खराब हो ,तो नए -ताजे वादे बेचने वाले चले आते हैं। अगर बेचने वालों को इस बात का यकीन हो जाये कि आप गाँठ के पूरे हैं , तो वे किसी भी माल का बाज़ार सजा सकते हैं। इसमें कोई मंदी कतई आड़े नहीं आती है। जैसे बस में कोई आपको हाज़मे की गोली और आँख का सुरमा बेचकर चला जाता है ,तो इससे कोई मतलब नहीं है कि आपका हाज़मा कैसा है और आपकी नज़र कैसी है ? वैसे ही अगर आप गाँठ के पूरे हैं ,तो यह मान ही लिया जाता है कि आप आँख के अंधे तो होंगे ही। नहीं भी होंगे ,तो वह आपकी नज़र बाँध देगा। बिजनेस और मैनेजमेंट की पढ़ाई में यही कला तो सिखाई जाती है। खैर ,दिल्ली में शुद्ध हवा बेचने वालों ने अपना बाज़ार सजा लिया है। अभी तक शुद्ध पानी बेचनेवाले जो बाजार सजाये बैठे थे ,उन्हीं के बगल में उन्होंने भी अपना ठीहा जमा लिया है। कुछ तो दोनों बेच रहे हैं। हल्ला यह भी तो है कि जब हवा ही खराब है ,तो शुद्ध पानी पीकर भी क्या कर लोगे ? अभी तक तो मास्क और एयर प्यूरीफायर ही मिल रहे थे , अब शुद्ध हवा बोतलों के रूप में भी उपलब्ध है। वैसे ही जैसे शुद्ध पानी बोतलों के रूप कब का उपलब्ध है। आपको कौन सी हवा की बोतल चाहिए -ऑस्ट्रेलिया वाली कि नैनीताल वाली ? पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की ही हवा खराब है,फिर दिल्ली रहो ,गाज़ियाबाद या फिर फरीदाबाद ? पर हाँ ,इनके मुकाबले अलवर की हवा भी बोतल के रूप में मिलने लगे ,वैसे ही जैसे कोई -कोई उद्यमी नलके के पानी को बोतलबंद कर बेच लेता है। मार्केटिंग स्किल चाहिए ,और क्या?
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